
स्वास्थ्य मेला में उमड़ा जनसैलाब, मेले के दूसरे दिन 10 हजार से अधिक मरीजों ने ली स्वास्थ्य सेवाएं: मंगल पांडेय।
दिनभर विभिन्न स्टॉलों पर लगी रही भीड़, हजारों लोगों ने लिया स्वास्थ्य लाभ।
दो दिवसीय मेले का समापन मशहूर सितार वादक ऋषभ रिखीराम की गायिकी से हुआ।
स्वास्थ्य मंत्री ने मेले में सभी स्टॉल का किया निरीक्षण, लोगों की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी सुनी।
सास्कृतिक संध्या, मेंटल हेल्थ परिचर्चा व लाईव ओपीडी समेत निःशुल्क दवा वितरण रहा आकर्षण केंद्र।

पटना। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित ’’स्वास्थ्य मेला 2025’’ ’’अरोग्य पर्व’’ के दूसरे दिन ज्ञान भवन, पटना में जनसैलाब उमड़ पड़ा। स्वास्थ्य मेला न केवल आमजन की भागीदारी का प्रतीक बना, बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता, परामर्श, उपचार और मनोरंजन का संगम भी बना। इस अवसर पर बिहार सरकार के माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पाण्डेय ने स्वयं मेले में लगाए गए विभिन्न स्वास्थ्य स्टॉलों का निरीक्षण किया और मरीजों व चिकित्सा कर्मियों से संवाद स्थापित किया।स्वास्थ्य मंत्री श्री पांडेय ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश

कुमार के नेतृत्व और मार्गदर्शन में बिहार में स्वास्थ्य क्षेत्र में अद्वितीय और व्यापक बदलाव हो रहे हैं। स्वास्थ्य मेला इसी प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने आगे कहा कि बिहार सरकार की प्राथमिकता जनसामान्य को गुणवत्तापूर्ण और समावेशी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच सकें। स्वास्थ्य मेला के दूसरे दिन 10 हजार से अधिक नागरिकों ने ओपीडी में रजिस्ट्रेशन करा कर चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त किया। खासकर ऑर्थाेपेडिक और नेत्र रोग विभागों में मरीजों की सबसे अधिक भीड़ देखी गई।नेत्र विशेषज्ञों द्वारा जांच उपरांत जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क चश्मों का वितरण भी किया गया, जिससे विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और विद्यार्थियों को लाभ मिला। वहीं, मेले में लगाए गए 25 नर्सिंग काउंटरों पर 7000 से अधिक लोगों की बीपी, शुगर, हीमोग्लोबिन आदि की जांच की गई। जांच की पूरी प्रक्रिया त्वरित, व्यवस्थित और पारदर्शी रही। इसके अतिरिक्त, रक्तदान केंद्र पर सैकड़ों लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर समाज के प्रति अपनी सेवा भावना का परिचय दिया। वहीं मेले में 1206 बच्चियों का एचपीवी टीकाकरण किया गया। मेले में 1741 लोगों ने पैथोलॉजी सुविधा का लाभ उठाया।

श्री पांडेय ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में टेली-मानस सेवा ने युवाओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। बड़ी संख्या में युवाओं ने इस डिजिटल सेवा के माध्यम से अपनी मानसिक समस्याओं को साझा किया और विशेषज्ञों से परामर्श प्राप्त किया। इस दौरान डिप्रेशन, ओसीडी जैसी समस्याओं की पहचान कर गंभीरता से उपचार प्रक्रिया प्रारंभ की गई। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए मेंटल हेल्थ पर विशेष सेमिनार का आयोजन भी किया गया, जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए। मेले के कैंसर जांच काउंटर पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की जांच व काउंसलिंग की गई। इस दौरान एक 4 वर्षीय बच्चे में कैंसर की आशंका जताई गई जिसे बायोप्सी और एफएनएसी जांच हेतु संदर्भित किया गया है। इसके अतिरिक्त, एक अन्य मरीज में मुख कैंसर की पुष्टि की गई, जिसे आगे की कन्फर्मेटरी जांच के लिए भेजा गया। इस तरह, स्वास्थ्य मेला गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। स्वास्थ्य मेला में सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के लिए नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया, जिसमें गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव, नियमित जांच और टीकाकरण के महत्व के बारे में बताया गया। यह नाटक आमजन के बीच सार्वजनिक स्वास्थ्य शिक्षा का सशक्त माध्यम बनकर उभरा और दर्शकों ने इसे अत्यंत सराहा।
स्वास्थ्य मेले में बीएमएसआईसीएल द्वारा स्थापित मॉडल्स पीएमसीएच, सदर अस्पताल जहानाबाद, मॉडल अस्पताल मुंगेर एवं बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के प्रस्तुत मॉडल्स ने आगंतुकों को राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों और अधोसंरचना विकास की झलक दी। लोगों ने इन मॉडल्स के माध्यम से जाना कि किस प्रकार बिहार की स्वास्थ्य सेवाएं लगातार मजबूत और आधुनिक हो रही हैं। स्वास्थ्य मेला 2025 केवल चिकित्सा सेवाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें मनोरंजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी समावेश किया गया। जादूगर शो ने बच्चों और बड़ों को समान रूप से आकर्षित किया, जिससे स्वास्थ्य मेला में आए लोगों को हल्के-फुल्के मनोरंजन का अवसर भी मिला।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध कलाकार ऋषभ रिखीराम ने अपनी प्रस्तुति दी, जिससे समापन सत्र एक सांस्कृतिक उत्सव में परिवर्तित हो गया।
स्वास्थ्य मेला 2025 के आयोजन ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि राज्य सरकार आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह मेला न केवल इलाज का जरिया बना, बल्कि रोगों की समय पर पहचान, जागरूकता, परामर्श, उपचार, रक्तदान, मानसिक स्वास्थ्य, मातृत्व सुरक्षा और राज्य के नवाचारों को भी एक मंच पर प्रस्तुत करने वाला आयोजन सिद्ध हुआ। स्वास्थ्य मेला 2025 का भव्य आयोजन, जनसहभागिता और सेवाओं की गुणवत्ता ने इसे बिहार के सार्वजनिक स्वास्थ्य परिदृश्य में एक मील का पत्थर बना दिया है। यह आयोजन राज्य सरकार के ‘स्वस्थ बिहार, समृद्ध बिहार’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम है। स्वास्थ्य मेला में उमड़ी भारी भीड़ और नागरिकों की संतुष्टि इस बात का प्रमाण है कि बिहार स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। सरकार की यह पहल आने वाले समय में नवाचार, समावेशन और सशक्तिकरण के साथ एक हेल्दी बिहार के निर्माण में सहायक सिद्ध होगी।
श्री पाण्डेय ने कहा कि स्वास्थ्य मेले में दूसरे दिन आयुष पद्धति से कुल 1188 लोगों को ओपीडी में देखा गया। जिसमें आयुर्वेद में 408, होम्योपैथि में 425 और यूनानी में 355 मरीजों का इलाज किया गया। मेले में 32 लोगों का पंचकर्म हुआ। वहीं दोनों दिन मिलकर कुल 1500 से अधिक औषधीय पौधों का वितरण किया गया है।मेंटल हेल्थ पर आयोजित सेमिनार में पटना एम्स और एनएमसीएच के हेड ऑफ डिपार्टमेंट और अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद रहें। लोगों की समय पर पहचान, जागरूकता, परामर्श, उपचार, रक्तदान, मानसिक स्वास्थ्य, मातृत्व सुरक्षा और राज्य के नवाचारों को भी एक मंच पर प्रस्तुत करने वाला आयोजन सिद्ध हुआ। स्वास्थ्य मेला 2025 का भव्य आयोजन, जनसहभागिता और सेवाओं की गुणवत्ता ने इसे बिहार के सार्वजनिक स्वास्थ्य परिदृश्य में एक मील का पत्थर बना दिया है। यह आयोजन राज्य सरकार के ‘स्वस्थ बिहार, समृद्ध बिहार’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम है। स्वास्थ्य मेला में उमड़ी भारी भीड़ और नागरिकों की संतुष्टि इस बात का प्रमाण है कि बिहार स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। सरकार की यह पहल आने वाले समय में नवाचार, समावेशन और सशक्तिकरण के साथ एक हेल्दी बिहार के निर्माण में सहायक सिद्ध होगी।
