बाढ़ से प्रभावित तालाबों का राजस्व माफ करे सरकार: कश्यप

                                                                24 अगस्त 2025, पटना। बिहार वर्तमान मे भयंकर बाढ़ के चपेट में है ऐसे में तालाबों में पाली गई मछलियां बाढ़ में बह गई। जिससे राज्य में मत्स्यपालन पूरी तरह से ठप पड़ गया है। राज्य के मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार कई बार कह चुके है कि प्रदेश बाढ़ के चपेट में है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित ईलाको को हवाई सर्वेक्षण भी किया है, इसलिए राज्य सरकार तालाबों का राजस्व माफ करे। इस संबंध में बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ के प्रबंध निदेशक, ऋषिकेश कश्यप का कहना है कि बिहार जलकर प्रबंधन अधिनियम के तहत कानून बना हुआ है जिसके तहत सरकार बाढ़ से प्रभावित तालाबों को राजस्व माफ कर सकती है। सरकार के इस पहल से राज्य के लाखों गरीब परंपरागत मछुआरों का भला हो सकता है। राजस्व माफ नहीं होने की स्थिति में गरीब परंपरागत मछुआरे बेमौत मारे जाऐंगे।
मालूम हो कि प्रदेश में 50 हजार से अधिक तालाब है, इसमें से 50 प्रतिशत गंभीर रूप से बाढ़ के चपेट में है। राज्य सरकार तालाबों में पाली जा रही मछलियों का बीमा भी बंद कर रखी है। मालूम हो कि मत्स्य निदेशालय, बिहार सरकार के द्वारा वर्ष 2011 में मछलियों का बीमा प्रारम्भ कराया गया था। जिसमें प्रीमियम की आधी राशि मछुआरें एवं आधी राशि राज्य सरकार वहन करती थी। कुल 32 सौ प्रिमियम में 16 सौ राज्य सरकार एवं 16 सौ मछुआरों से संग्रहित कर बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ के माध्यम से ओरियंटल इंश्योरेंस कम्पनी को भुगतान किया जाता था।
श्री कश्यप ने आगे कहा कि बाढ़ से हुई क्षति के मामले में किसानों को मुआवजा दिया जाता है परन्तु मछुआरों द्वारा पाली गई मछलियों के क्षति होने पर मछुआरों को किसी भी प्रकार के मुआवजे का भुगतान नहीं किया जाता है। संघ के द्वारा इस संबंध में राज्य सरकार को पत्र लिखा गया था। राज्य सरकार के द्वारा बताया गया कि वर्ष 2017-18 तक बाढ़ के कारण मत्स्यपालकों को प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ा था। जिला स्तर से क्षति का 16 करोड़ 16 लाख की क्षति का आंकलन का प्रतिवेदन प्राप्त किया गया था। परन्तु एक भी रूपये का भुगतान मछुआरों को नहीं किया गया।
केन्द्र सरकार (गृह मंत्रालय) के आपदा प्रबंधन विभाग एवं बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के निर्णयानुसार मछुआरों को राहत हेतु मुआवजा दरों को लागू करने का निर्णय लिया गया था। इस योजना के लागू होने से राज्य के लाखों मछुआरों को बाढ़ के दौरान होने वाली क्षति का लाभ मिलने उम्मीद जगा था। केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय एवं राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा मत्स्यपालकांे/ मछुआरों को बाढ़ में हुई क्षति के लिए मुआवजें की घोषणा प्रत्येक वर्ष विज्ञापन निकालकर की जाती है। मालूम हो की ‘‘अंाशिक रूप से क्षतिग्रस्त नाव के लिए 6,000 रुपये, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त जाल के लिए 3,000 रुपये, पूर्णतः क्षतिग्रस्त नाव के प्रतिस्थापन के लिए 15,000 रुपये, पूर्णतः क्षतिग्रस्त जाल के प्रतिस्थापन के लिए 4,000 रुपये, मछली जीरा फार्म के लिये इनपुट सब्सिडी 18,000 रुपये प्रति हेक्टेयर भुगतान करने का प्रावधान किया गया था।‘‘ साथ ही छोटे एवं सीमांत किसानों को मछली के चारे हेतु इनपुट सब्सिडी 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर भुगतान करने का निर्णय लिया गया था। परन्तु राज्य सरकार के मत्स्य निदेशालय की मछुआ विरोधी नीति के चलते आज तक राज्य के एक भी मछुआरें को केन्द्र एवं राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ नहीं मिल सका। बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने मछुआरों को बाढ़ से हुई क्षति का मुआवजा भुगतान कराने, योजना का प्रचार-प्रसार करने, मछली बीमा योजना को लागू करन एवं बाढ़ से प्रभावित तालाबों को राजस्व माफ करने की मांग मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री से पत्र लिखकर किया है।
इस संवाददाता सम्मेलन में निदेशकगण् प्रदीप कुमार, मदन कुमार, सुनिल कुमार, सदस्य यसवंत कुमार, रवि राज, दयानंद कुमार, मोनू कुमार, रानी देवी एवं रेहान अहमद उपस्थित।
                                                                                    (रवि राज)
                                                                                मीडिया प्रभारी
                                                                            मो० 6204972009

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