“गुणवत्तायुक्त बीज से समृद्ध खेती की नींव—किसानों को शुद्ध बीज उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : राम कृपाल यादव”

“गुणवत्तायुक्त बीज से समृद्ध खेती की नींव—किसानों को शुद्ध बीज उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : राम कृपाल यादव”
19 फरवरी, पटना
बिहार सरकार के माननीय कृषि मंत्री श्री राम कृपाल यादव ने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में बीज एक अत्यंत महत्वपूर्ण तथा निर्णायक उपादान है, जिस पर अन्य सभी कृषि निवेशों की सफलता प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तायुक्त एवं शुद्ध बीज के बिना उच्च उत्पादन की कल्पना संभव नहीं है, इसलिए बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
कृषि मंत्री ने बताया कि बिहार सरकार का कृषि विभाग बीज गुणवत्ता नियंत्रण की सुदृढ़ एवं वैज्ञानिक व्यवस्था के साथ कार्य कर रहा है। राज्य में बीज नमूनों की जांच हेतु मजबूत प्रयोगशाला तंत्र विकसित किया गया है, जिसके अंतर्गत राज्य स्तरीय बीज विश्लेषण प्रयोगशाला, पटना के साथ-साथ छह क्षेत्रीय बीज विश्लेषण प्रयोगशालाएँ—भभुआ, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, सहरसा, दरभंगा एवं मोतीहारी—सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।
उन्होंने आगे बताया कि इसके अतिरिक्त राज्य के अन्य 31 जिलों में जिला स्तरीय बीज विश्लेषण प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं तथा उनके प्रभावी संचालन हेतु आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इस प्रकार राज्य के सभी 38 जिलों में बीज नमूनों की जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे किसानों को प्रमाणित एवं गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराने में व्यापक सहायता मिलेगी।
माननीय मंत्री ने कहा कि इन प्रयोगशालाओं में प्राप्त आधिकारिक एवं सेवा बीज नमूनों की जांच वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप की जाती है। परीक्षण के दौरान भौतिक शुद्धता, नमी तथा अंकुरण क्षमता का परीक्षण किया जाता है, जिससे बीज की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन संभव हो पाता है। जांच के उपरांत संबंधित व्यक्तियों को प्रतिवेदन ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और त्वरित सूचना सुनिश्चित होती है।
श्री यादव ने पुनः दोहराया कि राज्य सरकार किसानों को प्रमाणित, शुद्ध एवं उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तायुक्त बीज की उपलब्धता से न केवल कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों की आय सुदृढ़ होगी और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।

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